এখানে যাযাবরী ডাক শুনতে ভালো লাগে, কারণ-- সন্ধ্যা গাঢ় হলে। জোনাক ঝাঁক অন্ধকারে ঝি-ঝি, ডাক ক্রমাগত লাফিয়ে চলা ব্যাঙ, শান্ত মোহনায় কদাচিৎ নৌকো পারাপার।
কবিতা
আবহ নেপথ্যে
प्रेम की परिभाषा
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আবহ নেপথ্যে
রঞ্জিত মালো ১৬ এপ্রিল ২০২৩
এদিকটায় বোধহয় বহুদিন যোগ নেই নদীর,
কারো সান্নিধ্যে সে ব্যস্ত
চেয়ে থাকা ছাড়া, কবির পাওয়ার কিছু নেই তারপর, শুরু চড়াই উৎরাই ঠেলে দিশাহীন।
ধুলো মলিনপথে হেটে আসা নেপথ্যে--
এখানে যাযাবরী ডাক শুনতে ভালো লাগে, কারণ--
সন্ধ্যা গাঢ় হলে। জোনাক ঝাঁক অন্ধকারে ঝি-ঝি, ডাক ক্রমাগত লাফিয়ে চলা ব্যাঙ, শান্ত মোহনায় কদাচিৎ নৌকো পারাপার।
পাড় ভাঙ্গা চর জেগে ওঠা, বালুকা রাশি হাতে গোনা মানুষজন, ব্যস্ততা।
আকাশে পাহাড়ের মত মেঘ কতক বা গাছের আকার, ফুসফুসে বাতাস ----
উপবাসী জটিল ধাঁধা নিয়ম ভেঙ্গে উত্তাপ নিতে হয় নিরবতার।।
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प्रेम की परिभाषा
सोनी साव 16April 2023
दिल में हो उम्मीद और आशा ।
प्रेम से लिखी हो अपनी भाषा
आज बताती हूं आप सभी को
प्रेम कि क्या है परिभाषा ।।
हर रिश्ते में हो अपनापन
जैसे कृष्ण सुदामा का बचपन
जैसे मीरा और राधा की गाथा
यह तो है प्रेम की परिभाषा।।
प्रेम से है नजरें झुक जाती
प्रेम ही हमें विनम्र बनाती
या तो एक दरिया है ऐसा
जिसने पत्थर भी बह जाता ।।
हर रिश्ता प्रेम से ही सजता
प्रेम में कोई भेदभाव ना रहता
मां की ममता में प्रेम अपार
जिसकी व्याख्या ना कर सका संसार।।
पिता के प्यार का तो यह असर है
आसान हो जाती हर मुश्किल डगर है
प्रेम निस्वार्थ और निश्छल है
या तो गंगाजल जैसा निर्मल है ।।
प्रेम को देह से ना कोई सरोकार है
आत्मा और मन ही इसका आधार है ।
प्रेम नहीं है कोई बंधन ऐसा
जिसमे आप किसी को बांधो ।।
प्रेम तो दो आत्माओं का मिलन है
जिसे तुम निस्वार्थ भावना से साधो
जैसे कृष्ण और राधा रानी
अमर है जिनकी प्रेम कहानी ।।
जैसे मीरा का प्रेम था सच्चा
विष भी लगा उसे अमृत जैसा।
प्रेम से मिले उसे ऐसी शक्ति
विष पीकर कर रही वह वैसी ।
अंधेरों में जब भटको तुम
रह जाए ना जब कोई आशा
हाथ बढ़ाकर साथ दे कोई
यही है प्रेम की परिभाषा।।
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